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जिसके लिए किया अनुष्ठान, वही निकली कातिल! राजा की मौत से जुड़ा चौंकाने वाला सच: तंत्र क्रिया के पांचवें दिन मिला था राजा का शव, अब शिप्रा में बहाए गए फोटो और कपड़े!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में सामने आई एक दिल दहला देने वाली सच्चाई ने न सिर्फ पूरे शहर को हिला दिया, बल्कि एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि इंसान किस हद तक गिर सकता है। जिस सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची, उसके लिए खुद राजा का परिवार मंदिरों में पूजा-अनुष्ठान कर रहा था। लापता बेटे की सलामती की कामनाएं की जा रही थीं, नदियों में फोटो और कपड़े प्रवाहित किए जा रहे थे – लेकिन हकीकत यह थी कि उसी समय राजा की जिंदगी छीनने वाला षड्यंत्र रचा जा चुका था।
राजा 23 मई से लापता था। बेटे की तलाश में परिजन देवास से लेकर उज्जैन तक भटकते रहे। इसी दौरान राजा के परिजन उज्जैन के चिंतामन रोड स्थित अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महंत रामेश्वर दास के पास पहुंचे। उन्होंने महंत से राजा और उसकी पत्नी सोनम की सलामती और पता लगाने के लिए विशेष अनुष्ठान करवाने की गुहार लगाई। महंत ने उस पूरे रहस्यमयी अनुष्ठान की जानकारी साझा की।
महंत रामेश्वर दास के मुताबिक, 28 मई को गुजरात का एक शिष्य और राजा का परिवार एक युवक अभिषेक के साथ उनके पास आया था। वे राजा और सोनम के फोटो और कपड़े लेकर आए थे। महंत ने ‘गुमशुदा लोगों के लिए किए जाने वाले विशेष तांत्रिक अनुष्ठान’ की शुरुआत की। राजा के कपड़े में एक अभिमंत्रित यंत्र रखा गया, उसे गोबर से लपेटकर एक स्थान पर जमा किया गया और उसके ऊपर 50 किलो का वजन रखा गया। इस अनुष्ठान के साथ रोज विशेष बीज मंत्रों का जाप किया गया।
इस अनुष्ठान की शुरुआत के ठीक पांचवें दिन, यानी 2 जून को राजा रघुवंशी का शव परिवार को मिल गया। इसके बाद उसी दिन सोनम भी वापस सामने आई। महंत ने यह भी बताया कि राजा के कपड़े और फोटो, जिनसे अनुष्ठान किया गया था, उन्हें किसी के हाथ न लगें – इसीलिए उन्हें शिप्रा नदी में प्रवाहित कर दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सोनम ने राजा की हत्या की साजिश रची, उसी की सलामती के लिए राजा का पूरा परिवार अनुष्ठान कर रहा था। परिजन उसकी खोज में भटकते रहे, अनजाने में उसकी रक्षा की कामनाएं करते रहे, जबकि वह किसी और के साथ राजा को ठिकाने लगाने की योजना में शामिल थी।